बडगाम के रहने वाले पेशे से शिक्षक इरफ़ान अहमद कहते हैं, "जब मुझे
अहसास हुआ कि स्कूल जल्दी नहीं खुलने वाले हैं तो मैंने सोचा कि कुछ ऐसा
करना चाहिए ताकि छात्रों की कुछ पढ़ाई हो सके और साथ ही उन्हें इस तनाव भरी
स्थिति से दूर भी रखा जा सके."
लेकिन इरफान के लिए ऐसा कुछ भी शुरू करना एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि सभी संचार सुविधाएं पूरी तरह से ठप्प थीं
और ऐसी किसी भी चीज़ की जानकारी लोगों तक पहुंचाना एक मुश्किल काम था.
उन्होंने
कहा, "हम इन बच्चों के घरों में गए. शुरू-शुरू में केवल 5-10 बच्चे ही आए. हम बच्चों के घरों में जाते रहे और अन्य बच्चों से भी ऐसा ही करने के लिए कहा. हमारी कोशिशें सफल हुईं और अभ हमारे पास 200 से अधिक छात्र हैं."
इरफान
के पॉप-अप स्कूल की छात्र मुनीज़ा फैज़ कहती हैं कि जब वे इस सेंटर तक आने के दौरान वे घबराई रहती हैं, "सड़कें सुनसान रहती हैं, हम डरे रहते हैं कि कहीं सेना या अन्य सुरक्षा बल हमें उठा कर न ले जाएं. हम समूह में साथ चलते हैं. हम एक दूसरे के घर जाते हैं ताकि साथ इस सेंटर तक आएं."
दिल्ली
पब्लिक स्कूल श्रीनगर के एक प्रमुख स्कूलों में से है, जब स्कूल में छात्र नहीं आ रहे थे तो उन्होंने एक अलग तरीके पर काम किया.
डीपीएस ने प्रत्येक छात्र के लिए असाइन्मेंट बनाया और उसे छात्रों के घर भेजा गया.
डीपीएस
श्रीनगर में प्रशासनिक कार्यों को देखने वाले नवाज़ कहते हैं, "जब हमें
एहसास हुआ कि यह बंद लंबा खींचेगा तो 15 अगस्त से हमने हर दिन असाइनमेंट की
1,20,000 कॉपियां तैयार की. हमें 2010 से 2016 के बीच शटडाउन का अनुभव था.
तब पेरेंट स्कूलों में आकर असाइनमेंट लेकर जाते थे. तब हमने कश्मीर के
दैनिक अख़बारों में जानकारी दी थी."
वे कहते हैं, "जब बुरहान वानी के
मारे जाने के बाद 2016 में शटडाउन किया गया तब हमें लगा कि हमें असाइनमेंट
से अधिक भी कुछ करना चाहिए. फिर हमने लेक्चर की रिकॉर्डिंग करनी शुरू कर
दी. हम उसे छात्रों को भेजते थे. तब से अब तक हमने बहुत सुधार किए हैं. अब हमारे पास रिकॉर्डिंग के लिए पूरी स्टूडियो व्यवस्था मौजूद है."
नवाज़ कहते हैं कि डीपीएस ने लंबे समय तक चलने वाले बंद से निबटना सीखा है ताकि
छात्रों के नुकसान न उठाना पड़े. 2010 के बंद के दौरान स्कूल ने असाइनमेंट की प्रिंटिंग का काम शुरू किया और 2016 में इसमें वीडियो लेक्चर को जोड़ा
गया और अब 2019 में हम प्रिंट और वीडियो दोनों तरह के असाइनमेंट छात्रों के
भेज रहे हैं.बीबीसी से कुछ पेरेंट ने अपना नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा कि, "यदि आप यह नहीं जानते कि बच्चे पढ़ रहे हैं या नहीं तो असाइनमेंट देने का क्या फायदा?"
"अधिकारी चाहते हैं कि स्कूल खुलें ताकि
सामान्य स्थिति बहाल की जा सके, परीक्षाएं तो स्कूलों को शुरू किए जाने की
महज़ एक कवायद है. लेकिन इसे छात्रों की सुरक्षा और अंधकारमय भविष्य की
कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए."
Wednesday, October 30, 2019
Tuesday, October 8, 2019
इमरान ख़ान देश के भीतर ही एक मार्च से परेशान- पाँच बड़ी ख़बरें
पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि उनकी सरकार जमिअत उलेमा-ई-इस्लाम-फ़ज्ल यानी
जेयूआई-एफ़ के आगामी आज़ादी मार्च से डरी हुई नहीं है.
मुल्तान में
पत्रकारों से बात करते हुए महमूद क़ुरैशी ने कहा, ''जेयूआई-एफ़ का यह
लोकतांत्रिक अधिकार है. लेकिन मैं बार-बार कह रहा हूं कि उन्होंने इस मार्च के लिए ग़लत वक़्त चुना है. उन्होंने जो तारीख़ चुनी है वो ग़लत है.''27 अक्टूबर को जेयूआई-एफ़ पाकिस्तान में इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ मार्च निकालने जा रहा है. दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि जब कश्मीर को लेकर इमरान ख़ान भारत को दुनिया भर में घेरने की कोशिश कर रहे हैं ऐसे में देश के भीतर इस तरह का राजनीतिक टकराव ठीक नहीं है.
क़ुरैशी ने कहा कि 27 अक्टूबर कश्मीरियों के समर्थन में खड़े होने का दिन है जबकि जेयूआई-एफ़ इस दिन को देश के भीतर राजनीतिक टकराव में घसीटने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि जब अंतर्राष्ट्रीय फ़ोकस कश्मीर पर है ऐसे यह विरोध ध्यान भटकाने वाला साबित होगा.
उधर पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो इस मार्च के समर्थन में हैं. भुट्टो ने कहा कि पीपीपी इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ इस मार्च को राजनीति और नैतिक समर्थन देती है. भुट्टो ने कहा कि इमरान ख़ान की सरकार को इस साल के आख़िर तक हटा देना चाहिए. बिलावल ने कहा कि विपक्ष की राजनीति के विकल्प लगातार कम हो रहे हैं ऐसे में इस्लामाबाद में विरोध करने के अलावा कोई उपाय नहीं है.
पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख और राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने भारत को निशाने पर लिया है. जनरल मुशर्रफ़ ने कहा, ''पीएम मोदी को नहीं भूलना चाहिए कि इसी साल फ़रवरी महीने में पाकिस्तान ने भारत के लड़ाकू विमान को मार गिराया था और पायलट को गिरफ़्तार कर लिया था.'' मुशर्रफ़ ने कहा कि पाकिस्तान की आर्मी ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं.
मुशर्रफ़ ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एपीएमएल) के प्रमुख हैं और उन्होंने पाकिस्तान की राजनीति में फिर से लौटने के संकेत दिए हैं. मुशर्रफ़ ने पार्टी के नौवें स्थापना दिवस पर कहा, ''हमलोग कश्मीरियों के साथ पूरे दमखम के साथ खड़े हैं. हम अपने शरीर के लहू के आख़िरी बूंद तक लड़ेंगे.''
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जा ख़त्म होने के दो महीने से ज़्यादा वक़्त होने के बाद राज्य के प्रशासन ने कहा है कि गुरुवार से पर्यटकों के आने पर लगी पाबंदी हट जाएगी. पाँच अगस्त को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करने की घोषणा की थी तो पर्यटकों को जम्मू-कश्मीर से जाने के लिए कह दिया गया था. तब से पर्यटकों की आवाजाही बंद थी.
भारत प्रशासित कश्मीर में 24 अक्टूबर को ब्लॉक डिवेलपमेंट काउंसिल के चुनाव भी होने हैं. इसे देखते हुए यहां की मुख्यधारा की दोनों पार्टियों के नज़रबंद नेताओं से पार्टियों के प्रतिनिधिमंडल को मिलने की अनुमति भी दी गई है.
अपनी गर्लफ़्रेंड से दोस्त की क़रीबी से ईर्ष्या में चाकू घोंप हत्या करने का मामला सामने आया है. यह मामला दिल्ली के अमन विहार का है. इस अपराध में मुख्य अभियुक्त मोनु को उसके दोस्तों से भी मदद मिलने की बात कही जा रही है.
कहा जा रहा है कि मोनु को उसके दोस्त और प्रेमिका के बीच बातचीत ठीक नहीं लगती थी. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मोनु इस क्राइम को अंजाम देने के बाद अपना सिर मुंडवा चंदन नाम के दोस्त के साथ जम्मू चला गया था लेकिन पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.
इराक़ के राष्ट्रपति बरमह सालेह ने एक टेलीविज़न संदेश में हिंसा ख़त्म करने की अपील की है. देश में पिछले एक सप्ताह से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं जिसमें 100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों घायल हुए हैं.
प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाए जाने की मांग कर रहे हैं. राष्ट्रपति ने दोनों तरफ़ से हुई हिंसा की निंदा की और दोषियों को जनता का दुश्मन बताया.
राष्ट्रपति ने कहा, "शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों पर गोलीबारी करना और पत्रकारों को निशाना बनाना उस इराक़ के लिए अस्वीकार्य है, जहां हमने लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाई है और जहां अधिकार और आज़ादी के अधिकार हैं. "
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