Wednesday, October 30, 2019

दिल्ली पब्लिक स्कूल की पहल

बडगाम के रहने वाले पेशे से शिक्षक इरफ़ान अहमद कहते हैं, "जब मुझे अहसास हुआ कि स्कूल जल्दी नहीं खुलने वाले हैं तो मैंने सोचा कि कुछ ऐसा करना चाहिए ताकि छात्रों की कुछ पढ़ाई हो सके और साथ ही उन्हें इस तनाव भरी स्थिति से दूर भी रखा जा सके."
लेकिन इरफान के लिए ऐसा कुछ भी शुरू करना एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि सभी संचार सुविधाएं पूरी तरह से ठप्प थीं और ऐसी किसी भी चीज़ की जानकारी लोगों तक पहुंचाना एक मुश्किल काम था.
उन्होंने कहा, "हम इन बच्चों के घरों में गए. शुरू-शुरू में केवल 5-10 बच्चे ही आए. हम बच्चों के घरों में जाते रहे और अन्य बच्चों से भी ऐसा ही करने के लिए कहा. हमारी कोशिशें सफल हुईं और अभ हमारे पास 200 से अधिक छात्र हैं."
इरफान के पॉप-अप स्कूल की छात्र मुनीज़ा फैज़ कहती हैं कि जब वे इस सेंटर तक आने के दौरान वे घबराई रहती हैं, "सड़कें सुनसान रहती हैं, हम डरे रहते हैं कि कहीं सेना या अन्य सुरक्षा बल हमें उठा कर न ले जाएं. हम समूह में साथ चलते हैं. हम एक दूसरे के घर जाते हैं ताकि साथ इस सेंटर तक आएं."
दिल्ली पब्लिक स्कूल श्रीनगर के एक प्रमुख स्कूलों में से है, जब स्कूल में छात्र नहीं आ रहे थे तो उन्होंने एक अलग तरीके पर काम किया.
डीपीएस ने प्रत्येक छात्र के लिए असाइन्मेंट बनाया और उसे छात्रों के घर भेजा गया.
डीपीएस श्रीनगर में प्रशासनिक कार्यों को देखने वाले नवाज़ कहते हैं, "जब हमें एहसास हुआ कि यह बंद लंबा खींचेगा तो 15 अगस्त से हमने हर दिन असाइनमेंट की 1,20,000 कॉपियां तैयार की. हमें 2010 से 2016 के बीच शटडाउन का अनुभव था. तब पेरेंट स्कूलों में आकर असाइनमेंट लेकर जाते थे. तब हमने कश्मीर के दैनिक अख़बारों में जानकारी दी थी."
वे कहते हैं, "जब बुरहान वानी के मारे जाने के बाद 2016 में शटडाउन किया गया तब हमें लगा कि हमें असाइनमेंट से अधिक भी कुछ करना चाहिए. फिर हमने लेक्चर की रिकॉर्डिंग करनी शुरू कर दी. हम उसे छात्रों को भेजते थे. तब से अब तक हमने बहुत सुधार किए हैं. अब हमारे पास रिकॉर्डिंग के लिए पूरी स्टूडियो व्यवस्था मौजूद है."
नवाज़ कहते हैं कि डीपीएस ने लंबे समय तक चलने वाले बंद से निबटना सीखा है ताकि छात्रों के नुकसान न उठाना पड़े. 2010 के बंद के दौरान स्कूल ने असाइनमेंट की प्रिंटिंग का काम शुरू किया और 2016 में इसमें वीडियो लेक्चर को जोड़ा गया और अब 2019 में हम प्रिंट और वीडियो दोनों तरह के असाइनमेंट छात्रों के भेज रहे हैं.बीबीसी से कुछ पेरेंट ने अपना नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा कि, "यदि आप यह नहीं जानते कि बच्चे पढ़ रहे हैं या नहीं तो असाइनमेंट देने का क्या फायदा?"
"अधिकारी चाहते हैं कि स्कूल खुलें ताकि सामान्य स्थिति बहाल की जा सके, परीक्षाएं तो स्कूलों को शुरू किए जाने की महज़ एक कवायद है. लेकिन इसे छात्रों की सुरक्षा और अंधकारमय भविष्य की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए."

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