Wednesday, September 26, 2018

सोपोर में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने दो आतंकी ढेर किए

रीनगर. जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, इलाके में और भी आतंकी छिपे होने की आशंका है। सरक्षाबल सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। 

पुलवामा-शोपियां में तलाशी अभियान तेज

  1. पुलिस ने बताया, सुरक्षाबलों को तुज्जर इलाके के नौपोरा गांव में कुछ आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इसी दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।
  2. सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मारे गए। वहीं, प्रशासन ने मुठभेड़ के चलते इलाके के सारे स्कूल बंद कर दिए हैं। इंटरनेट पर भी रोक लगा दी गई है।
  3. दक्षिण कश्मीर में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से सुरक्षाबल पुलवामा और शोपियां में तलाशी अभियान चला रहे हैं। खुफिया विभाग ने इलाके में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी दी थी।
  4. हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने शुक्रवार को शोपियां से पुलिस के तीन जवानों को अगवा कर लिया था। बाद में उनके शव गोलियों से छलनी मिले।
    नेशनल डेस्क/अमेठी: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल सौदे को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। इस बीच उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो कि अमेठी दौरे के दौरान का है, इस वीडियो में राहुल गांधी कह रहे हैं- 'अभी तो शुरुआत हुई है। अभी देखना, मजा आएगा। आने वाले 2-3 महीने में मजा दिखाएंगे हम आपको।' इससे पहले अगस्त में राहुल ने कहा था कि राफेल में वैश्विक भ्रष्टाचार है। आने वाले कुछ हफ्तों में राफेल से बड़े बम गिरने वाले हैं।
    राहुल ने कहा- मोदी चौकीदार नहीं, चोर हैं
    राहुल ने कहा कि एक-एक कर हम दिखा देंगे कि नरेंद्र मोदी
    नेशनल डेस्क, चेन्नई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। यह नामांकन भाजपा तमिलनाडु की अध्यक्ष डॉ. तमिलसाई सौंदराजन ने कराया। इसके लिए उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर योजना ‘आयुष्मान भारत’ का हवाला दिया है।
    बीजेपी अध्यक्ष के पति ने भी नामांकन किया : तमिलसाई के पति डॉ. पी. सौंदराजन ने भी प्रधानमंत्री को इस सम्मान के लिए नामांकित किया है। डॉ. पी. सौंदराजन नेफ्रोलॉजी के वरिष्ठ परामर्शदाता और राज्य के प्राइवेट विश्वविद्यालय के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष हैं।
    - सौंदराजन ने कहा कि पीएम मोदी दूरदर्शी हैं, जिन्होंने करोड़ों लोगों की सहूलियत के लिए यह योजना लागू की है। पार्टी अध्यक्ष ने बताया कि देश में गरीबी को देखते हुए यह हेल्थकेयर योजना काफी सराहनीय है।
    तमिलसाई ने देश-विदेश के सभी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और आम नागरिकों से नोबेल शांति पुरस्कार 2019 के लिए पीएम मोदी के नामांकन में उनका साथ देने की अपील की है।
    ऐसे मिलता है नोबेल : नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 31 जनवरी 2019 है। इसकी नामांकन प्रक्रिया हर साल सितंबर में शुरू होती है। पहले चरण में जनता से नामांकन मंगाए जाते हैं। जो नाम मिलते हैं उन पर एक्सपर्ट्स विचार करते हैं।
    - नामांकित लोगों की खासियतों, उनकी खोज पर चर्चा होती है। नामित व्यक्ति के बारे में संबंधित देश की सरकार, पूर्व नोबेल विजेताओं, प्रोफेसरों से राय मांगी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया करीब एक साल तक चलती है।
    किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत नोबेल पुरस्कार के लिए उसका नाम नामित करने का नियम नहीं है, किन्तु यदि नामांकन के उपरांत व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे पुरस्कार प्रदान किया जा सकता है। अब तक दो बार ऐसा हो चुका है।
    - यदि किसी श्रेणी में दो विजेताओं को संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया जा रहा है, तो पुरस्कार राशि को बराबर भाग में बांटा जा सकता है। यदि तीन विजेता हैं तो प्रथम विजेता को आधी और शेष राशि को अन्य दो विजेताओं में बराबर बांटा जा सकता है।
    चौकीदार नहीं हैं, चोर हैं। मोदी सरकार ने हर जगह बेईमानी की है। मोदी के राफेल, ललित मोदी, विजय माल्या, नोटबंदी, गब्बर सिंह टैक्स जैसे सभी कामों में चोरी हुई है।
    राहुल ने कहा था- मोदी चोरों के सरगना
    कांग्रेस अध्यक्ष ने सोमवार को ट्विटर पर एक वीडियो को शेयर करत मोदी को चोरों का सरगना (इंडियाज कमांडर इन थीफ) बताया था। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरोपों पर कहा कि कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार को बदनाम करने का अभियान चला रही है।
    ओलांद के बयान पर बढ़ा था विवाद
    ओलांद ने कहा था कि रिलायंस को राफेल के स्थानीय भागीदार के रूप में चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। हालांकि, 24 घंटे बाद ही उन्होंने कहा- रिलायंस को चुने जाने के बारे में दैसो ही कुछ बता सकती है।

Monday, September 10, 2018

मोदी के पक्ष में कैसे जुटा मीडिया?

जैसा अभूतपूर्व वह छविहनन अभियान था उतना ही वह जनसमर्थन रहा है जिसने मोदी को एक आंधी बना कर प्रधानमंत्री बना दिया. इसलिए यह कहना कि मोदी को मीडिया ने बनाया है मज़ाक है.
मीडिया के बड़े हिस्सों का मोदी के पक्ष में जुटना तब हुआ जब प्रचार अभियान के दौरान उनको मिल रहे ऐतिहासिक समर्थन और स्वीकार्यता की अप्रत्याशित लहर का एहसास होना शुरू हुआ.
वह लहर मोदी और शाह की रणनीति, चुनावी तैयारी, विराट संसाधनों और टेक्नोलॉजी के कभी न देखे गए इस्तेमाल और सबसे ज़्यादा मोदी की अपनी ऊर्जावान, मौलिक वक्तृता और नए सपने दिखाने की कला से पैदा हुई थी. मीडिया इस गाड़ी में बाद में सवार हुआ.
शिव कहते हैं, दो दशक पहले मोदी पूरी तरह एक अफ़वाह थे. यह अद्भुत स्थापना है. सच यह है कि दो दशक पहले वह भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता थे जो बाद में महासचिव बने.
उनका गुजरात जाना, मुख्यमंत्री बनना किसी सोची समझी योजना के तहत नहीं भाजपा और गुजरात के भीतर उस समय की परिस्थितियों ने अचानक संभव कर दिया. वह अफ़वाह नहीं कभी-कबार मीडिया में आने वाले एक पार्टी नेता थे, बस.
मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद गोधरा और गुजरात दंगों में मोदी की छवि मीडिया ने एक आइकन या आदर्श नहीं इसके बिलकुल उलट एक भयानक खलनायक की बनाई थी.
इस अभूतपूर्व रूप से नकारात्मक मीडिया छवि से लड़ कर, उसे हरा कर मोदी सत्ता के शिखर पर पहुंचे. मोदी मीडिया के खोजे और बनाए हुए नहीं थे तब, मीडिया के मारे हुए थे.
आज चार साल बाद स्थिति कुछ दृष्टियों से उलट गई लगती है. शिव को अभी सिर्फ़ वही दिख रही है.
जैसा ,मैं ऊपर कह चुका हूं, आज का सच सचमुच यह है कि तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया का एक प्रभावशाली हिस्सा मोदी-महिमा में शामिल है. किन्तु एक हिस्सा, पूरा नहीं. यह हिस्सा अनालोचक हो गया है. पर यह कहना कि पूरा मीडिया ऐसा हो गया है, वैचारिक अतिवादिता है और अधूरी बात है.
शिव की शिकायतें जायज़ भी हैं. नोटबंदी पर मीडिया तथ्यपरक नहीं रहा कुछ को छोड़ कर. लेकिन उस समय लगभग पूरा देश, खासतौर पर मध्यम वर्ग और खुद मोदी तथा उनकी सरकार भी नोटबंदी की अच्छाईयों के सपनों से अभिभूत थे.
वह एक अत्यंत गंभीर गलती थी, मिसकैलकुलेशन था. पर सबको यह तो दिख रहा था कि मोदी ने एक भारी राजनीतिक जोखिम उठा कर यह कदम उठाया था. वह पूरी तरह नाकाम रहा, लेकिन इसने मोदी को बड़े, क्रांतिकारी किस्म के, देशहित में कड़े और अलोकप्रिय कदम उठाने की क्षमता वाले नेता के रूप में स्थापित किया. देश नीति में मोदी पर शिव की एक टिप्पणी गौरतलब है जो चकित करती है. मोदी के शिंजो आबे, पुतिन, ट्रंप के साथ दोस्ताना तस्वीरें खिंचवाने और इनसे लोगों को मोह लेने का आरोप लगाते समय शिव कहते हैं - मीडिया इन चार देशों के नैतिक खालीपन को देखना भूल जाता है.
क्या शिव जैसे गंभीर, वरिष्ठ चिंतक यह नहीं जानते कि असली राजनय में नैतिकता हमेशा, और हर देश के लिए, एक औपचारिकता के अलावा कुछ नहीं होती. उसपर देशहित का राजनय नहीं होता न हो सकता है.
विदेश मामलों में केवल देशहित सर्वोपरि होता है और यह देशहित नैतिक नहीं आर्थिक, सैनिक या रणनीतिक होता है।
लेकिन एक बात जो अपनी मीडिया आलोचना में शिव ने नहीं कही वह मैं कहना चाहता हूं. यह दुखद है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते. चार साल में एक भी नहीं. मीडिया को दूर रखते हैं. यह गलत है.
उन्हें करनी चाहिए सभी लोकतांत्रिक प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों की तरह. लेकिन अगर भारतीय मीडिया सचमुच उतना ही ठोस रूप से मोदी भक्त होता तो क्या मोदी उससे कतराते?

Wednesday, September 5, 2018

किसानों की कब्रगाह में बदलता पंजाब

मुख्तियार सिंह सर उठाकर पंजाब के आसमान को टकटकी बांधे देखते हैं. उनकी 75 साल पुरानी बूढ़ी आंखें यहां बरनाला ज़िले में पड़ने वाली गर्मियों की तेज़ धूप से टकराकर अचानक चुंधिया सी जाती हैं.
लेकिन वो फिर सर उठाकर आसमान को देखते हैं. इस बार आंखों में पानी लिए. तभी अचानक उनकी सांस तेज़ हो जाती है और हरी पगड़ी के नीचे जमा पसीने की बूंदे पूरे चेहरे को भिगोने लगती हैं.
वह हांफते हुए कहते हैं, "उस आख़िरी शाम जब मेरा बेटा घर आया था, तब वो भी इस आसमान को ही देख रहा था. उसकी माँ ने चाय-पानी पूछा तो बोला नहीं पीऊँगा. उसकी माँ को कुछ अजीब लगा तो उसने पैसे का पूछा. बेटे ने कहा मुझे क्या करना पैसों का?”
उस शाम मुख्तियार का बेटा गुरलाल जैसे नींद में चलते हुए घर लौटा था. फ़रवरी की ठंड में भी उसे पसीने आ रहे थे और वो बस अपना सर उठाए आसमान को देखे जा रहा था.
उसकी माँ ने पूछा, आसमान में क्या देख रहा है. जवाब में बेटे ने कहा, ‘ऊपर आसमान में पंछी गोल गोल चक्कर लगा रहे हैं. मैं ये उड़ते पंछी ही देख रहा हूँ’. बस इतना कहकर वो गश खाकर ज़मीन पर गिर पड़ा. उसके मुँह से झाग निकलने लगा.
हमने तुरंत उसे उठाकर खटिया पर लिटा दिया. तब हमें मालूम नहीं था कि वो स्प्रे (कीटनाशक) पीकर आया था. इसलिए हमने सोचा उसे कोई दौरा पड़ा है. पर इससे पहले कि हम उसे इलाज के लिए ले जा पाते, वो चला गया.
मुख्तियार बरनाला जिले के बदरा गांव में रहने वाले किसान हैं. उनके बेटे की ही तरह उनके गांव में अब तक 70 किसान बढ़ते कर्ज़ के चलते ख़ुदकुशी कर चुके हैं. बेटे की मौत के वक़्त मुख्तियार के परिवार पर भी 5 लाख रुपए का कर्ज़ था जो उन्होंने अपनी 2 बेटियों की शादी और खेती से जुड़े ख़र्चे पूरे करने के लिए लिया था.
लेनदार घर आकर पैसे मांगते और पैसे न दे पाने की वजह से गुरलाल परेशान रहते. पर घर में सबको हिम्मत बंधाने वाले इस बेटे ने किसी को अंदाज़ा नहीं होने दिया की वह अंदर ही अंदर टूट रहे थे.
मुझे देखते ही गुरलाल की बूढ़ी माँ रोने लगती हैं. बेटे से हुई आख़िरी बातचीत उनके ज़हन में अब भी ताज़ा है. पूछने पर सिर्फ़ गुरु गोविंद सिंह के छोटे साहेबजादों (गुरु गोविंद सिंह के बच्चों) के साथ लगी अपने बेटे की बचपन की तस्वीर दिखाती हैं.
उनके ख़ामोश आंसुओं की गूंज जैसे दोपहर के सन्नाटे को चीरते हुए उसी आसमान तक जाती थी, जिसको देखते हुए उनका बेटा चला गया था.
भारतीय सिनेमा में सालों से परोसी जा रही सरसों के खेतों, दूध की नदियों और नाचते गाते पंजाब के ख़ुशहाल किसानों वाली छवि के पीछे छिपी असली ज़मीनी कहानी मेरे लिए अभी शुरू ही हुई थी.
दिल्ली से शुरू हुई यात्रा जैसे ही दक्षिण पंजाब में दाख़िल होती है, आंकड़ो में खींची गई उदासीन तस्वीर आसपास ज़िंदा होने लगी. धूल की एक मोटी जर्द परत में डूबे बरनाला, संगररूर और मनसा ज़िलों के गांव किसी गहरी उदासी में डूबे थे.
साठ के दशक में हरित क्रांति के महनायकों के तौर पर उभरा पंजाब आज किसानों की क़ब्रगाह में क्यों तब्दील हो चुका है? ख़ुशहाली और समृद्धि के प्रतीक के तौर पर पहचाने जाने वाले इस राज्य में आज मौत का सन्नाटा क्यों पसरा पड़ा है? इन सब सवालों के जवाब ढूँढते हुए हम बरनाला ज़िले के भूटना गांव में रहने वाली 47 वर्षीय हरपाल कौर के घर पहुंचे.
रपाल के घर की दीवारों की तरह ही उनकी ज़िंदगी में भी कोई नहीं रंग था. बीती तीन पुश्तों में उनके घर के चार लोग आत्महत्या कर चुके हैं. इस फ़ेहरिस्त में सबसे नया नाम हरपाल के पति 50 वर्षीय भगवान सिंह का है जिन्होंने इसी जनवरी में ख़ुदकुशी कर ली. इससे पहले भगवान के पिता, उनके दादा और चाचा ने भी बढ़ते क़र्ज़ और घटती आमदनी के चलते आत्महत्या कर ली थी. साल दर साल परिवार पर बीती त्रासदियों की छाप घर के माहौल में साफ़ महसूस की जा सकती थी. स्लेटी रंग के सलवार क़मीज़ पर काले रंग का दुपट्टा ओढ़े खड़ी हरपाल के व्यक्तित्व में दुख इस तरह घुल मिल गया था जैसे उनके शरीर का कोई हिस्सा हो. देर तक ख़ामोश रहने के बाद हरपाल ने बातचीत शुरू की. हमारे पास एक एकड़ से भी कम ज़मीन है. इस ज़मीन पर सिर्फ़ जानवरों के लिए चारा उग पाता है. खेती के लिए हमें ज़मीन किराए पर लेनी पड़ती है. पिछले साल भी हमने 15 एकड़ ज़मीन ठेके पर लेकर खेती की थी. सारी फ़सल तैयार खड़ी थी कि साल के आख़िर में ओले पड़ गए. हमारी खड़ी फ़सल बर्बाद हो गयी.
मेरे पति को वैसे भी ब्लड प्रेशर था. वो फ़सल ख़राब होने की टेंशन ले गए. परेशान रहने लगे. अक्सर रोते रहते और मुझसे कहते कि अब वो अकेले हो गए हैं. पहले से ही हमारे सर पर 8 लाख का क़र्ज़ था, उसपर भी फ़सल ख़राब हो गई तो हालात क़ाबू के बाहर हो गए”.
हरपाल बताती हैं कि उनके और उनके पति के लिए इस मुश्किल जीवन की पृष्ठभूमि उनकी शादी से पहले ही तैयार हो चुकी थी. उनके शादीशुदा जीवन की सबसे पुरानी यादें भी क़र्ज़ से आज़ाद नहीं हैं. वह जोड़ती हैं, “मेरे पति ने सारी ज़िंदगी जी तोड़ मेहनत की. ख़ुद फ़सल की रोपाई करते, फिर सिंचाई और देखभाल भी. दिसंबर की ठंड में भी जानवरों की रखवाली के लिए उन्हें खेतों पर जाना पड़ता था. पर हमारी क़िस्मत जैसे पहले ही तय हो चुकी थी.”
हरपाल का परिवार क़र्ज़ के एक ऐसे दुश्चक्र में फँस गया था जो पीढ़ी दर पीढ़ी घर के सदस्यों को निगलता जा रहा था.
“पहले दादा ने ख़ुदकुशी की फिर उनका क़र्ज़ न उतार पाने की वजह से मेरे ससुर ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने भैसों के गले में बांधी जाने वाली रस्सी से ख़ुद को फाँसी लगाई थी. इसी तरह बढ़ते क़र्ज़ के चलते मेरे ससुर के भाई ने भी स्प्रे पीकर ख़ुदकुशी कर ली. अब इन सबके जाने के बाद घर में जो लड़कियाँ बचीं थीं, उनकी शादी की ज़िम्मेदारी मेरे पति पर ही आ गई.
उन्होंने चाचा की बेटियों और अपनी बहनों तक सबकी शादियाँ करवाईं, लेकिन जब अपने बच्चों की बारी आई तो उनके पास कुछ नहीं बचा था. वो रोते और मुझसे कहते थे कि सब उनके सर कर्ज़ा डाल कर उन्हें अकेला छोड़ कर चले गए.”
घर में हुई तीन आत्महत्याओं के बाद हरपाल को शक तो था कि उनके पति ऐसा कुछ कर सकते हैं. इसलिए वो पति को अकेला नहीं छोड़ती थीं.
लेकिन 15 जनवरी 2018 की रात भगवान सिंह रोज़ की तरह जानवरों से खेत की रखवाली करने के लिए घर से निकले. पत्नी ने उन्हें रात का खाना साथ में बाँध कर दे दिया था. पर सबके सो जाने के बाद बीच रात भगवान वापस घर लौटे. घर के एक कमरे में उनकी पत्नी और बच्चे सो रहे थे. ठीक उसके बाज़ू वाले कमरे में उन्होंने ख़ुद को फाँसी लगा ली. अगले दिन सारी दुनिया के लिए सुबह हुई पर हरपाल के जीवन में ये रात इतनी जल्दी ख़त्म होने वाली नहीं थी.

Monday, September 3, 2018

FB यूजर्स के लिए खुशखबरी, अब मिलेगा भाषाओं का सटीक अनुवाद

फेसबुक में रिसर्चर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए कम संसाधनों वाली भाषाएं जैसे ऊर्दू और बर्मी के सरल और सटीक अनुवाद का तरीका विकसित किया है. एक जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से मिली है.
फोर्ब्स के मुताबिक, महत्वपूर्ण खोज को एम्पिरिकल मेथड्स इन नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग या 
दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल उसकी नीतियों और नियमों का उल्लंघन किए जाने के कारण प्रति सेकेंड लगभग 100 स्कैम विज्ञापनों को हटा रही है और भविष्य में ऐसे विज्ञापनों से बचने के लिए जल्द ही वेरिफिकेशन प्रोग्राम शुरू करेगी.
सैमसंग, शाओमी और ऐपल जैसे मशहूर ब्रांड के स्मार्टफोन की मांग सेकेंड हैंड बिक्री बाजार में भी खूब देखने को मिल रही है. ऑनलाइन सेकेंड हैंड स्मार्टफोन खरीद-बिक्री से जुड़े प्लेटफॉर्म  के आंकड़ों पर गौर करें तो सेकेंड हैंड स्मार्टफोन बाजार में ये ब्रांड तीनों अव्वल स्थान पर हैं.
स्कोडा ऑटो ने नए सुपर्ब स्पोर्टलाइन एडिशन को ऑफिशियल वेबसाइट पर लिस्ट किया है, जिससे माना जा रहा है कि भारत में जल्द इसकी लॉन्चिंग हो सकती है. स्कोडा सुपर्ब स्पोर्टलाइन कंपनी के फ्लैगशिप सेडान का स्पोर्टी और फन-टू-ड्राइव वेरिएंट हो सकता है.
लेनोवो के स्वामित्व वाले मोटोरोला ने अपने नए एंड्रॉयड वन स्मार्टफोन्स Motorola One और Motorola One Power को बर्लिन में  में पेश कर दिया है. इन स्मार्टफोन्स की चर्चा काफी पहले से लगातार हो रही थी.
में पेश किया जाएगा. फेसबुक के लिए ये खोज महत्वपूर्ण साबित हो सकता है क्योंकि सोशल मीडिया कंपनी दुनिया भर में यूजरों को उनकी पसंदीदा भाषा में पोस्ट पढ़ने में मदद के लिए ऑटोमैटिक लैंग्वेज ट्रांसलेशन का इस्तेमाल करती है.
मौजूदा मशीनी अनुवाद प्रणाली कुछ भाषाओं में इंसानी स्तर के प्रदर्शन को हासिल कर सकती है, लेकिन उसके पास सीखने के लिए विभिन्न भाषाओं में एक ही वाक्य का अपार संग्रह होना चाहिए.
फेसबुक AI रिसर्च (FAIR) डिवीजन की टीम मशीन ट्रांसलेशन ( ) सिस्टम को ट्रेनिंग देने में कामयाब रही है. इसमें विकिपीडिया जैसी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वेबसाइट्स से विभिन्न भाषाओं के विभिन्न टेक्स्ट को फीड किया गया है. सबसे अहम यह है कि ये वाक्य एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं.
फेयर के पेरिस रिसर्च लैब के प्रमुख और शोधकर्मी एंटनी बोर्डस ने कहा कि एक समानांतर संग्रह तैयार करना बहुत जटिल काम है क्योंकि इसके लिए दोनों भाषाओं में पारंगत लोगों की जरूरत होती है. मसलन, पुर्तगाली/नेपाली का समानांतर संग्रह तैयार करने के लिए इन दोनों भाषाओं में पारंगत लोगों की जरूरत होती है और यह बेहद कठिन काम है.
यहां जानें दिनभर क्या रहा टेक जगत का हाल. हम यहां आपको टेक्नोलॉजी की दुनिया की 5 बड़ी खबरें दे रहे हैं, नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते हैं हमारी पूरी खबर...
टोयोटा ने अपने बेस्ट सेलिंग प्रोडक्ट्स   और  को भारतीय बाजार के लिए अपडेट कर दिया है. कंपनी ने इन कारों में नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है. इन कारों को अपडेट सेफ्टी और टेक्नोलॉजी दोनों के हिसाब से दिया गया है.
बैंकों का 9 हजार करोड़ से ज्यादा कर्ज न चुकाने वाले कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने की कोशिशें अब तक कामयाब नहीं हो पाई हैं. इस बीच उससे जुड़ी एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जिसमें ये दावा किया गया है कि अब तक प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से जो नोटिस माल्या को भेजे जा रहे थे, वो गलत पते पर भेजे गए.
विजय माल्या के वकील अमित देसाई ने ये दावा किया है. दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय समेत दूसरी जांच एजेंसियां भी माल्या की धरपकड़ में लगी हुई हैं. ब्रिटेन की अदालत में माल्या के प्रत्यर्पण का केस भी चल रहा है. जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से विजय माल्या को नोटिस भी भेजे गए. इसी में माल्या को 27 अगस्त को कोर्ट में पेश होने का नोटिस भी भेजा गया था.
माल्या के पेश न होने पर सफाई देते हुए नोटिस के जवाब में अमित देसाई ने कहा कि ईडी ने माल्या को जो भी नोटिस भेजे हैं, वो गलत पते पर भेजे गए हैं और उन्हें एजेंसी का कोई भी नोटिस नहीं मिला है. देसाई का दावा है कि ये नोटिस बेंगलुरु स्थित दफ्तर पर भेजे गए हैं. अब देसाई ने ये भी कहा है कि उन्हें जवाब देने के पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए.
बता दें कि विजय माल्या के खिलाफ लंदन में प्रत्यर्पण केस चल रहा है. भारतीय बैंकों के साथ कर्ज में नौ हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी विजय माल्या दो मार्च 2016 देश छोड़कर फरार हो गए था और पिछले दो साल से लंदन में ही रह रहा है.

Friday, August 31, 2018

सुप्रीम कोर्ट ने कहा एससी-एसटी को केवल गृह राज्य में आरक्षण मिल सकता है

सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक बेंच ने गुरुवार को कहा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति को सरकारी नौकरियों में केवल उनके गृह राज्य में ही आरक्षण मिल सकता है. इस बेंच ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति अपने गृह राज्य से किसी दूसरे राज्य में बस गया है तो उसे दूसरे राज्य में आरक्षण का फ़ायदा नहीं मिलेगा.
इस बेंच ने यह आदेश इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के एक वि

रोधाभासी फ़ैसले को लेकर दिया है. पाँच जजों की बेंच में जस्टिस रंजन गोगोई, एनवी रमन, आर भानुमति, एमएम संतनागौदार और एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे.
इस बेंच ने कहा कि कोई व्यक्ति अगर दूसरे राज्य में बस गया है तो उसके गृह राज्य में उसके अनुसूचित जाति या जनजाति होने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. इस बेंच ने यह बात राज्य और केंद्र शासित राज्यों में संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के ज़रिए मिलने वा

ले आरक्षण के फ़ायदों पर कही है. 19 के लोकसभा चुनावों को लेकर बिहार के एनडीए में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जेडीयू और बीजेपी के बीच सीटों के बँटवारे पर एक नया प्रस्ताव सामने आया है. बीजेपी ने जेडीयू के सामने 20-20 का फ़ॉर्म्युला रखा है.
बीजेपी बिहार की कुल 40 सीटों में से 20 पर

अमरीकी डॉलर की तुलना में भारतीय मुद्रा रुपए में गिरावट थम नहीं रही है. गुरुवार को रुपए में ऐतिहासिक गिरावट के साथ मार्केट बंद हुआ. एक डॉलर की क़ीमत गुरुवार को 70.86 रुपए तक पहुंच गई.
बताया जा रहा है कि महीने के आख़िर में डॉलर की मांग में ब

ढ़ोतरी और तेल की क़ीमतों में उछाल के कारण ऐसा हुआ है. पिछले हफ़्ते से ही रुपए में गिरावट जारी है. बाज़ार के डीलरों का कहना है कि आरबीआई को इसे रोकने के लिए गंभीरता से सोचना चाहिए ताकि भगदड़ जैसी स्थिति पैदा नहीं हो.
लड़ना चाहती है और अपने सहयोगियों को 20 सीटें देना चाहती है. 20 में 12 पर जेडीयू, 6 पर रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और दो पर उपेंद्र कुशवाह की आरएलएसपी को लड़ाने का प्रस्ताव पेश किया है.
हालांकि एनडीए के नेताओं ने किसी भी फॉर्म्युले पर सहमति से इनकार किया है. जेडीयू ने 2014 के लोकसभा चुनाव में 38 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन दो पर ही जीत मिली थी जबकि बीजेपी ने 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 22 पर जीत मिली थी. जेडीयू का कहना है कि बीजेपी पहले रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाह को सीट दे दे तब उससे बात करे.

गिरफ़्तारी के दो दिन बाद हैदराबाद लौटे क्रांतिकारी लेखक वरवर राव ने कहा है कि जो फ़ासीवादी नीतियों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं उन्हें साज़िशकर्ता कहना एक बड़ी साज़िश का हिस्सा है.
राव ने कहा कि इससे बड़ी कोई साज़िश नहीं हो सकती है. पुणे पुलिस ने वरवर राव को महाराष्ट्र के भीमा कोरेगाँव में हिंसा के मामले में गिरफ़्तार किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को उनके घर में ही नज़रबंद रखने का आदेश दिया है.
वरवर राव ने कहा कि यह फ़र्ज़ी मुक़दमा है और उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जो सरकार की फ़ासीवादी नीतियों के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं.


अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर उनके देश के साथ बेहतर बर्ताव नहीं किया गया तो वो विश्व व्यापार संगठन से हट जाएंगे.
ट्रंप अक्सर डब्ल्यूटीओ की यह कहते हुए आलोचना करते रहे हैं कि इसमें बने रहने से अमरीका को घाटा है. ट्रंप प्रशासन की संरक्षणवादी नीतियां डब्ल्यूटीओ की खुली व्यापार व्यवस्था के ख़िलाफ़ हैं.

Thursday, August 30, 2018

绿色气候基金:仅仅是美好的构想?

富国终于肯为绿色气候基金掏钱了。可是,即便富国在12月利马气候会议之前承诺了93亿美元作为示好,若要确保气候援助资金能够成为达成全球气候协议的“垫脚石”而非“绊脚石”,富国要做的事情还有很多。

周四,30个国家代表齐集柏林,承诺为绿色气候基金(一个旨在帮助发展中国家减少温室气体排放并适应气候变化的基金)筹款93亿美元,这离联合国要求的在下个月利马会议之前筹集100亿美元的目标相差无几。

一年之前,绿色气候基金的帐面上还空空如也。因此,周四富裕国家做出的93亿美元的承诺受到了广泛欢迎。各国现在可以开始申报项目,申报期直到2015年底的巴黎气候大会之前。

世界资源研究所的分析员阿历克斯·杜卡斯说:“周四发布的通告表明,绿色气候基金如今势头正健,不仅能够在从现在开始到巴黎气候大会召开的这段时间里取得巨大的进展,而且还要阐明资金未来的去处。”

他还说:“考虑到上周中美关于排放目标的联合宣言,气候基金的资金承诺将有助于利马气候大会取得进展。”

尽管发展中国家希望捐助国能够在今年年底前承诺拿出150亿美元的愿望落空,但此次承诺的93亿美元也会使得这些国家不能再以此为借口,而在 11月底开始的联合国气候谈判事项中无所作为。

2009年的哥本哈根气候大会宣布从2020年开始,发达国家每年向发展中国家提供1000亿美元用于资助其开展减排和气候变化适应项目。但发展中国家一直在指责发达国家逃避兑现承诺,这让本就出名缓慢的联合国气候谈判进程雪上加霜。

但是,气候资金问题上取得的进展可能意味着,那些相对贫困却有着高碳排放强度的国家(尤其是中国和印度,以及越南和印尼等新兴经济体)探讨制定自身宏大的减排目标的意愿更加强烈。

杜卡斯指出:“发达国家的资金承诺意味着发展中国家可以看到用于低碳和减排项目的切实款项,当然他们希望有更多的资金投入,尤其在适应气候变化方面。”

但从某些角度来说,说服发达国家最终打开钱包拿出100亿美元的初始资金,可能是最容易的一个环节。

如果要兑现发达国家在哥本哈根大会上做出的承诺,气候资金总额(绿色气候基金是其重要组成部分,但并非全部)需要在未来五年中扩大10倍。

这既需要各国政府贡献更多的资金,也需要私营部门将资金投入到那些与气候适应相关的方案中去,而这些方案的投资回报则未必比得上投资可再生能源项目。

目前为止,适应项目获得的资金仅占气候资金总额的六分之一,而绿色气候基金希望能够将一半的预算用于帮助人们应对气候变化的影响上。

对各国政府来说,鼓励私营部门的投资成为一件越来越紧迫的任务,特别是那些担心因国内民粹主义而会对外国援助进行抵制的国家。

刚刚从中期选举中获胜的美国共和党国会议员已经发誓要力挫奥巴马总统本周做出的捐款30亿美元的承诺。在英国,执政保守党中日益强大的右翼力量想要限制对外援助预算。因此,想要动用公共资金资助海外气候项目可能会变得越来越困难。

英国首相大卫·卡梅隆在柏林会议上强调其承诺的资金来自现有的预算,或许这是因为他对民粹和民族主义政党——王国独立党所表达的“本国为先”的观点有所顾虑所致,而后者恰好在同一天在议会递补选举中获胜。

其它气候基金的数据也表明,政客们的承诺与实际行动之间存在很大差距。

据气候基金更新网站估计,迄今各国、基金会以及企业承诺拿出的气候基金达已到210亿美元,但已经“支出”或者到位的仅有30亿美元。

不过,资金方面之所以出现这个差距,部分原因是由于一直未能建立一个能够运作并有效、透明地管理气候基金的官方机构。还有一项研究则认为这个差距是由于重复计算了(本应标注为“非新增”融资)承诺资金,以及苛刻的贷款条件所致,比如利率太高,从而将小型气候适应项目拒之门外。

此外,批评人士说今天在柏林开会的这些国家不应该现在就自称自赞,因为他们承诺的款项要在长达5年的时间里才能兑现。

国际环境与发展研究所( )的高级研究员涅哈·雷说:“这93亿美元并非重复发放的年度资金,而是一次性的。与哥本哈根大会上做出的从2020年开始每年提供1000亿美元的承诺相比,这笔钱显得微不足道。”

决策者面临一个重大问题是:由于发达国家和发展中国家都面临着税制改革,而这些改革将反映导致气候变化的化石燃料的真实市场价格,那么以前用于补贴化石燃料的那些款项能变成气候资金吗?


绿色气候基金私营部门咨询小组的成员阿马尔-李·阿敏说:“如果各国政府能成功地做到这一点,那将有助于弥补资金上的差距”。

Wednesday, August 29, 2018

我为什么抗议马云狩猎?

中国富豪、阿里巴巴董事局主席马云英国狩猎,遭遇中国环保人士抗议。

有英国媒体报道,两年前,马云花费3.6万英镑,于苏格兰一个小村落租了一座城堡,与11位朋友共同打猎,一周内猎取17只雄鹿。

中国环保组织“自然大学”随后发公开信,表示抗议,称其行为将激发中国富豪狩猎热,对野生动物保护工作产生负面影响。

抗议马云狩猎
,有可能意味着“自然大学”以后将得不到阿里巴巴公益基金会的资助。但“自然大学”创办人冯永锋并不后悔。他说,环保组织是要有态度的,对某个问题有看法和判断,就要及时说出来。一个行业的健康,也需要这样的深度互动。这才是真正的团结。

中外对话采访了冯永锋。

中外对话:有网民认为,
“自然大学”抗议马云狩猎是在“捏软柿子”与其向马云抗议,不如要求欧、美、非洲等地区跟中国一样禁止狩猎。您怎么看待“捏软柿子”?

冯永锋:在中国,环保组织经常要打“遭遇战”,每天会发生什么事,你根本没法预料到。遭遇了,就要表态,就要表达,就要干预。“自然大学”是一家以行动干预加行动研究见长的组织,我们每天都在针对事件做积极的回应。我们一年介入类似的事件成百起。马云只是一个小案例而已,他不是“软柿子”也不是“硬柿子”。从环保角度来说,这也算不上什么特色案例,只是我们诸多遭遇战中的一个小战役。没什么大惊小怪的。

我们当然也在调研中国的狩猎问题,虽然做得并不持续。我们这两年干预的大量野生动物尤其是鸟类的保护案例,已经足以证明,中国的野生动物每天都在遭遇各种残酷的捕杀。没有一个物种不是在中国人的威逼下苟延残喘。一些具体的调查结果我们也会陆续公布。

中外对话:
许中国富人去英国等发达国家狩猎,是不是一件好事,毕竟还有很多运动狩猎爱好者,中国富人也是人,也有享受合法爱好和运动狩猎的权利。他们去管理规范的国家狩猎,能否减轻中国野生动物保护的压力?

冯永锋:不可能,打哪国的动物都是杀害动物。而且要命的是,这些人不会因为到了国外打猎,就学会了尊重自然和保护环境,相反,他们只是过了一把开枪的杀戮瘾而已。

中外对话:说中国不适合狩猎,“自然大学”有过详细调查吗?

冯永锋:中国物种的灭绝速度,估计是全世界最快的。原因很简单,一是自然栖息地的大量散失和破碎化,二是各种形式的捕杀和食用,三是无止境的人工养殖许可导致野外种群被大量捕捉,四是各种动物园、标本爱好者、宠物爱好者的大量购买和消费。

我们当然不可能对国内的所有情况进行调查。但我们每天都在干预各种遭遇到的野生动物伤害事件,也和全国的关注动物保护的组织有密切来往。中国这片土地上,对野生动物每天都发生着什么事,我们应当是极清楚的。

中外对话:
马云对中国环保事业是有贡献的,因其两年前在英国的一次并不违法的狩猎经历,而严加指责,这对马云是不是不公平?从团结环保人士的角度来看利弊如何?

冯永锋:马云的阿里巴巴基金会正在尝试资助中国的民间环保组织,他们的探索我们是看在眼里的。但马云过度相信了“世界先进”,耗巨资去和大自然保护协会(TNC)来往,我觉得这个做法很愚蠢。因为中国的环境保护,希望一定在中国的“草根”组织身上。你不全力支持“草根”,却花这么高的学费去学些可能根本用不上的“先进技能”,我认为得不偿失。

环保组织是要有态度的,你对某个问题有看法和判断,就要及时地说出来。一个行业的健康,也需要这样的深度互动。这才是真正的团结。如果说担心他们以后不资助 “自然大学”,就不敢说话了,这不是我们的风格。虽然,明快表达是一定会有代价的。确实有可能,阿里巴巴公益基金会,会因为我们的批评表态,而不愿意再资助我们。

中外对话:
有观点认为,把运动狩猎绝对化加以否定,仅从这点来看,就暴露出中国环保组织的一个软肋:做事缺乏理性和科学精神,更多的是凭热情和理想在干。在中国做环保,最需要的是什么? 

冯永锋:理性和科学往往是最大的假象,那些说别人不理性不科学的人,自己也理性不到哪去,科学不到哪去。他们用来推理和试图压服他人的证据,要么是古代的片面说道根本站不住脚,要么是别国的探索完全与本国不沾边,要么是“大胆的假设”根本无法在现实中推行,要么是必须满足诸多不可能的条件下的狭窄可能。

我觉得,中国的问题在中国,解决中国问题的出路和智慧也都在中国。永远面对现实的环境问题,老实地去干预和改良,这是中国民间环境保护的唯一出路。这几年,我们还是很可悲地发现,这样工作的民间组织太少。现实问题都不去参与解决,理性和科学有何意义?何况,做公益、做环保,本来也不可能只靠理性和科学,在我看来,理性和科学在环境保护中的作用,最多只占10%,其他的90%,都是靠勇敢、智慧、笨重的行动和韧性。