Tuesday, November 27, 2018

वोटिंग के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर लगाया ये बड़ा आरोप

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज 6 दिसंबर से होना है। पहला टेस्ट मैच एडिलेड में खेला जाना है। उससे पहले टीम इंडिया को आज से क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया एकादश के खिलाफ चार दिवसीय प्रैक्टिस मैच खेलना था। सिडनी में लगातार हो रही बारिश के चलते पहले दिन का खेल बारिश में धुल गया। पहले दिन टॉस तक नहीं हो सका और टीम इंडिया को प्रैक्टिस करने का मौका नहीं मिला। कप्तान विराट कोहली ने बारिश के बीच भी कुछ ऐसा किया जिससे टीम इंडिया को टेस्ट सीरीज में मदद मिलेगी
विराट ने सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर की है। इस फोटो में विराट के साथ सलामी बल्लेबाज मुरली विजय और तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा भी नजर आ रहे हैं। बारिश ने टीम इंडिया को प्रैक्टिस का मौका नहीं दिया तो इन खिलाड़ियों ने जिम में जमकर पसीना बहाया। फोटो शेयर करते हुए विराट ने लिखा, 'बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है तो हमने अपने दिन का उपयोग करते हुए वर्कआउट किया। इन लड़को के साथ अच्छा वर्कआउट रहा।'
इससे पहले बीसीसीआई ने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें लगातार बारिश नजर आ रही है। फैन्स प्रैक्टिस मैच शुरू नहीं होने से काफी खफा नजर आए और कहा कि प्रैक्टिस मैच नहीं खेलने का भारत को टेस्ट सीरीज में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पहला टेस्ट भारत को एडिलेड के द ओवल मैदान पर खेलना है
मध्यप्रदेश (   2018) के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के पक्ष के कई मतदान केंद्रों में से ईवीएम खराब होने की सूचनाएं आ रही हैं।
दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा कि कई ऐसे मतदान केंद्रों पर, जो कांग्रेस के पक्ष के हैं, वहां से ईवीएम ख़राब होने के समाचार आ रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट्स से कहा है कि वे खराब मशीन के स्थान पर बदली जाने वाली मशीनों के नम्बर नोट कर लें और नयी मशीन को वोटिंग शुरु होने के पहले 50-100 वोट डाल कर चेक ज़रूर करें।
मध्यप्रदेश में आज मतदान हो रहा है। सुबह से ही कई स्थानों से ईवीएम में खराबी की खबरें आ रही हैं। बता दें कि आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पांच करोड़, चार लाख 33 हजार 079 मतदाता इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिए अपना मताधिकार का उपयोग कर सकेंगे। ये मतदाता चुनाव मैदान में मौजूद 2899 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे। मतदाताओं में दो करोड़ 63 लाख 01 हजार 300 पुरूष और दो करोड़ 41 लाख 30 हजार 390 महिलाएं शामिल हैं। सर्विस वोटर की संख्या 62 हजार 172 है।

Wednesday, November 7, 2018

साड़ी में नजर आईं साउथ कोरिया की फर्स्ट लेडी

अयोध्या: उत्तर प्रदेश की अयोध्या नगरी में दीपावली पर्व में भाग लेने भारतीय परिधान साड़ी में पहुंची दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की पत्नी किमजुंग-सुक स्थानीय लोगों में चर्चा का केंद्र बनी रहीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनसे प्रभावित हुये बिना नहीं रह सके. वह मंगलवार को अयोध्या पहुंचीं थीं. उन्होंने इस पवित्र नगरी में कई कार्यक्रमों में भाग लिया जिनमें स्थानीय लोगों खासकर युवाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे. जब उनका हेलीकॉप्टर यहां बने रामकथा पार्क के पास उतरा तो लोगों ने उनका जोरदार तालियों से स्वागत किया और ’जय श्री राम‘ के नारे लगाए. 
प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने मंगलवार को उनके साड़ी पहनने पर हर्ष व्यक्उन्होंने कहा, ‘‘अयोध्या और दक्षिण कोरिया के प्राचीन काल से संबंध रहे हैं. यह कड़ी भारत और दक्षिण कोरिया गणराज्य के मध्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की आधारशिला बनाती है.’’ किमजुंग ने एक कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद भी दिया. वह चार नवम्बर को भारत आईं थीं. रामकथा पार्क में अपने संबोधन में उन्होंने भारत और कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुये कहा कि उन्होंने दोनों देश की समृद्धि की कामना की है. उन्होंने अपने संबोधन में महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर का भी उल्लेख किया.
उन्होंने कहा कि वह दिवाली मनाने अयोध्या आने पर बहुत खुश हैं. सियोल वापस लौटने से पहले वह आगरा में ताजमहल देखने भी जायेंगी. उन्होंने अपनी यात्रा की शुरूआत रानी ह्वांग-ओक के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करके की. ह्वांग ओक अयोध्या की राजकुमारी थीं जो कोरिया चली गई थीं. इस राजकुमारी की स्मृति में यहां एक स्मारक भी बनाया गया है.
त किया और उनकी तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टि्वटर पर साझा किया. पीएम मोदी ने कहा, ‘‘ यह अति प्रसन्नता और गर्व का विषय है कि दक्षिण कोरिया गणराज्य की प्रथम महिला श्रीमती किमजुंग-सुक अयोध्या की यात्रा पर आयीं और परंपरागत भारतीय परिधान धारण किए. भारत के लोग उनकी इस उदारता की प्रशंसा करते हैं.’श्रीनगरः दिवाली के मौके पर पूरे देश के साथ साथ श्रीनगर बीएसफ मुख्यालय पर भी जश्न का माहौल है. श्रीनगर में तैनात बीएसएफ के जवान और उनके परिवार इस मेले में आकर दीपावली धूमधाम से दिपावली मना रहे हैं. जो जवान फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात हैं उनके परिवार इस मुख्यालय में अकेले ना महसूस करें इसके लिए अफसरों के परिवार उन्हें इस मेले में मिलकर दीपवाली की खुशियां बांटते है. इस तरह जवानों तक यह संदेश भेजा जा रहा है कि वो अकेले नहीं पूरा बीएसएफ उनके साथ खड़ा और उनपर गर्व भी करता है.
कश्मीर फ्रोंटयेयर आईजी की पत्नी नम्रता कुमार का कहना है " हमारे जवान जानते है उनकी प्राथमिकता क्या है और हम जानते है कि हमारा फ़र्ज़ क्या है. हमारे जवान यह बिलकुल ना समझें कि उनके परिवार अकेले हैं. हम उनके साथ हैं"
बीएसएफ कश्मीर फ्रोंटियर के आईजी अनुभव कुमार ने कहा " मैं अपने जवानों को दीपावली की शुभकामनाएं देना चाहता हूं. हमने हर जगह दीपावली के त्योहार को मानाने का बंदोबस्त किया है, लेकिन हमारे जवान साल के हर दिन चौकसी बरते हुए क्योंकि वो जानते है कि पडोसी देश के इरादे क्या रहते है"
इस मेले में विभिन किस्म के स्टाल सजाये गए, जहां खाने पीने के स्टालों के साथ साथ कई सामग्री सजी थी. साथ ही मनोरंजन और बच्चों के लिए खेलों के भी इंतज़ाम किये गए थे. पूरा मेला संगीत से गूंज रहा था. जवानों का मानना है कि ऐसे आयोजन उनका मनोबल बढ़ाते हैं और उन्हें यह महसूस नहीं होने देते कि वो अकेले है पूरी यूनिट एक परिवार दिखता है. 
सिपाही पवन कुमार ने कहा," ऐसे मेले लगने से हमें महसूस होता है कि हम एक परिवार है हम दोस्तों से मिलते है मौज मस्ती करते है. कठिन ड्यूटी में से त्योहारों पर कुछ समय निकल लेते हैं ऐसे कार्यक्रमों के लिए"
दीपावली हो या कोई त्योहार, हर किसी जवान को छूट्टी नसीब नहीं होती, क्योंकि जो जिम्मा इन जवानों ने संभाला है उसमे साल के हर दिन इन्होंने देश की सेवा में रहना का संकल्प लिया है और निसंदेह ही इसे हर कीमत पर पूरा भी करते है.

Tuesday, October 9, 2018

मुंबई में पेट्रोल का रेट 87.73 रुपए हुआ, दिल्ली में

 पेट्रोल के रेट मंगलवार को लगातार चौथे दिन बढ़े। मुंबई में पेट्रोल 87.73 रुपए और दिल्ली में 82.26 रुपए हो गया। दोनों शहरों में 23 पैसे का इजाफा हुआ। तेल कंपनियों ने डीजल की कीमतें 29 से 31 पैसे तक बढ़ाईं। चार अक्टूबर को केंद्र और 12 राज्यों ने पेट्रोल-डीजल के रेट घटाए। इससे 5 अक्टूबर को लोगों को कुछ राहत मिली। लेकिन, महंगे क्रूड और रुपए में गिरावट की वजह से तेल कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं।
चार अक्टूबर को केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 1.5 रुपया कम किया था। तेल कंपनियों को एक रुपया घटाने के लिए कहा गया। केंद्र की अपील पर भाजपा शासित राज्यों ने भी 2.5 रुपए घटाए।
अगस्त से तेल के दाम लगातार बढ़ रहे थे। चार अक्टूबर को दिल्ली में पेट्रोल 84 और मुंबई में 91.34 रुपए हो गया। ऐसे में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत 5 राज्यों में चुनाव को देखते हुए केंद्र को टैक्स घटाने का फैसला लेना पड़ा।
कच्चे तेल के रेट बढ़ने से तेल कंपनियों के लिए आयात महंगा हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट से भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। रुपया सोमवार को 74.06 पर बंद हुआ। इस साल रुपए में 16% से ज्यादा गिरावट आई।
नई दिल्ली. पेट्रोल के रेट मंगलवार को लगातार चौथे दिन बढ़े। मुंबई में पेट्रोल 87.73 रुपए और दिल्ली में 82.26 रुपए हो गया। दोनों शहरों में 23 पैसे का इजाफा हुआ। तेल कंपनियों ने डीजल की कीमतें 29 से 31 पैसे तक बढ़ाईं। चार अक्टूबर को केंद्र और 12 राज्यों ने पेट्रोल-डीजल के रेट घटाए। इससे 5 अक्टूबर को लोगों को कुछ राहत मिली। लेकिन, महंगे क्रूड और रुपए में गिरावट की वजह से तेल कंपनियां कीमतें बढ़ा रही हैं।
चार अक्टूबर को केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 1.5 रुपया कम किया था। तेल कंपनियों को एक रुपया घटाने के लिए कहा गया। केंद्र की अपील पर भाजपा शासित राज्यों ने भी 2.5 रुपए घटाए।
अगस्त से तेल के दाम लगातार बढ़ रहे थे। चार अक्टूबर को दिल्ली में पेट्रोल 84 और मुंबई में 91.34 रुपए हो गया। ऐसे में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत 5 राज्यों में चुनाव को देखते हुए केंद्र को टैक्स घटाने का फैसला लेना पड़ा।
कच्चे तेल के रेट बढ़ने से तेल कंपनियों के लिए आयात महंगा हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट से भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। रुपया सोमवार को 74.06 पर बंद हुआ। इस साल रुपए में 16% से ज्यादा गिरावट आई।
नई दिल्ली. प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) के चौथे संस्करण के लिए सोमवार को हुई नीलामी में स्पेन की कैरोलिना मारिन और रियो ओलिंपिक की रजत पदक विजेता पीवी सिंधु की सबसे अधिक मांग रही। मारिन को पुणे 7 एसेस और सिंधु को हैदराबाद हंटर्स ने 80-80 लाख रुपए में खरीदा। सिंधु के लिए यह एक तरह से घर वापसी है, क्योंकि पिछले दो संस्करणों से वे चेन्नई स्मैशर्स के लिए खेल रही थीं। लंदन ओलिंपिक की कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल पहले राउंड में अनसोल्ड रह गईं थीं, बाद में उन्हें नार्थ-ईस्ट वॉरियर्स ने 80 लाख रुपए में खरीदा। साइना लीग की आइकॉन खिलाड़ी हैं। सिंधु ने हैदराबाद हंटर्स का हिस्सा बनने पर ट्वीट कर खुशी जाहिर की।
पीबीएल के चौथे संस्करण का आयोजन बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) के बैनर तले स्पोट्जलाइव द्वारा किया जाएगा। लीग 22 दिसंबर, 2018 से 13 जनवरी 2019 तक खेली जाएगी। इसके मुकाबले पांच शहरों में होंगे। फाइनल बेंगलुरु में खेले जाएंगे।
पुरुषों में एचएस प्रणय दिल्ली डैशर्स और किदांबी श्रीकांत को बेंगलुरु रेप्टर्स ने 80-80 लाख रुपए में खरीदा। इस साल नो रिटेंशन या राइट टू मैच कार्ड नहीं था। इस कारण खिलाड़ियों की नीलामी को लेकर फ्रेंचाइजीस में जबरदस्त उत्साह था। हर टीम एक आइकॉन खिलाड़ी खरीदना चाहती थी।
इंडोनेशिया के टॉमी सुगिर्तो सबसे महंगे गैर-आइकान शटलर रहे। उन्हें डालमिया सीमेंट ग्रुप के स्वामित्व वाली दिल्ली डैशर्स ने 70 लाख रुपए में खरीदा। उनका बेस प्राइस 30 लाख रुपए था।
भारतीयों शटलर्स की बात करें तो सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी को अहमदाबाद स्मैश मास्टर्स ने 52 लाख रुपए में खरीदा। हालांकि, उनका बेस प्राइस महज 15 लाख रुपए ही था।
नीलामी के बाद मारिन ने कहा, ‘मैं पुणे टीम का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। हैदराबाद मेरे लिए दूसरे घर की तरह था, लेकिन अब पुणे में जाकर उत्साहित हूं। मुझे भारत के इस हिस्से को भी देखने का मौका मिलेगा।’
साइना ने कहा, ‘नार्थ-ईस्ट यूनाइटेड वॉरियर्स के साथ जुड़ना मेरे लिए बहुत बड़ा पल है। वहां के प्रशंसक जुनूनी हैं। मैं उनके लिए सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयास करूंगी। नार्थ-ईस्ट के लिए मेरे दिल में हमेशा से प्यार रहा है। मुझे उम्मीद है कि इस साझेदारी से उस पूर्वोत्तर में भी बैडमिंटन का विकास होगा।’

ऋषि कपूर से मिलने पति गोल्डी और ननद सृष्टि के साथ पहुंचीं सोनाली बेंद्रे, साथ थीं प्रियंका चोपड़ा

बॉलीवुड डेस्क.  अमेरिका में इलाज करा रहे ऋषि कपूर से मिलने हाल ही में प्रियंका चोपड़ा और सोनाली बेंद्रे पहुंचीं। सोशल मीडिया पर ऋषि के साथ उनके फोटो वायरल हो रहे हैं। ऋषि इन दिनों न्यूयॉर्क में हैं, बीमारी के चलते वे मां कृष्णा राज कपूर के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके थे। 

प्रियंका ने लिखा मैसेज :  ऋषि के साथ प्रियंका ने फोटो पोस्ट करते हुए लिखा- "आप दोनों को एक साथ देख कर काफी अच्‍छा लगा। आप दोनों ऐसे ही हंसते और मुस्‍कुराते रहिए।" दूसरी फोटो में ऋषि-नीतू, सोनाली बेंद्रे के पति गोल्डी बहल और ननद सृष्टि बहल भी नजर आ रही हैं।

नहीं दिखे रनबीर : इनमें से किसी भी फोटो में रणबीर कपूर अपने पेरेंट्स के साथ नहीं दिख रहे हैं। बात अगर ऋषि की बीमारी की करें तो इसे लेकर कई कयास लगाए जा रहा हैं कि उन्‍हें तीसरी स्टेज का कैंसर है लेकिन इसके बारे अभी कोई पुष्‍टि नहीं हुई है। हालांकि सोनाली इन दिनों न्यूयॉर्क में मेटास्टैटिक कैंसर का इलाज करा रही हैं।

अनुपम के साथ मैनहट्टन में दिखे ऋषि : अनुपम खेर के साथ मैनहट्टन की सड़कों पर घूमते दिखाई दे रहे हैं। ऋषि ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा- "न्यूयॉर्क, मैनहट्टन, खेर फ्री या भी केयर फ्री। दोपहर को मैडिसन एवेन्यू पर कलीग और पुराने दोस्त अनुपम खेर के साथ।" 

इंस्टा पर भी किया शेयर : अनुपम खेर ने भी यही वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा- "प्रिय ऋषि कपूर मैनहट्टन की सड़कों पर आपसे मिलना और आपके साथ वक्त बिताना रोमांचकारी रहा। आप वाकई बहुत ही अच्छे, मनोरंजक, बातचीत करने वाले इंसान हैं। आपसे इंडिया, न्यूयॉर्क, जिंदगी में फिल्मों के मैजिक और जरूरत पर बात करना अच्छा लगा। बहुत अच्छा लगा आपसे मिल के।"
बॉलीवुड डेस्क. रेस-3 के फ्लॉप हो जाने के बाद सलमान खान ने रेमो डिसूजा की अगली फिल्म को करने से मना कर दिया है। रेमो ने खुद इस बात की जानकारी दी है। रेमो ने बताया कि 'रेस-3 की आलोचना के चलते फिल्म को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।' इस तरह से कबीर खान के बाद रेमो दूसरे ऐसे डायरेक्टर बन गए हैं, जिनके साथ सलमान ने ऐसा किया है।
रेमो ने बताया कि बाप-बेटी की इमोशनल रिश्‍ते पर स्क्रिप्‍ट थी। इस स्क्रिप्ट को उन्होंने 'रेस 3' से पहले ही सलमान को सुना दी थी। सलमान को कहानी पसंद भी आई थी। सलमान ने फिल्म के लिए हामी भी भर दी थी। लेकिन अब इस फिल्म को उन्होंने रोक दिया है।
रेमो ने बताया कि सलमान ने ये तर्क देते हुए फिल्म रूकवा दी कि फिल्म 'बजरंगी भाईजान' के मिजाज की है। साथ ही 'ट्यूबलाइट' में तो किरदार ही बालबुद्ध‍ि वाला था। लिहाजा एक और बच्‍ची वाली फिल्‍म इस वक्‍त करना सही नहीं होगा।
रेमो ने बताया कि जिस फिल्म को सलमान ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है वो कब शुरू हो पाएगी ये तो सलमान ही बता सकते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा हालात तो ये हैं कि वे भी बिजी हैं और मैं भी बिजी हूं। उन्होंने बताया कि 'रेस 3' से पहले उस अगली फिल्‍म के लिए स्‍टार कास्‍ट तय हो चुकी थी। फिल्म का अनाउंसमेंट भी करने वाले थे। फिल्म की शूटिंग के लिए लोकेशन भी फाइनल हो चुकी थी।
सलमान खान की फिल्म 'रेस 3' का ट्रेलर आने के बाद से ही दर्शकों ने इसे बकवास कहना शुरू कर दिया था। फिर रिलीज के बाद फिल्म को दुनिया की 100 सबसे खराब फिल्मों में शामिल किया गया था। फिल्म के कंटेंट को लेकर डायरेक्टर रेमो डिसूजा की सोशल मीडिया और क्रिटिक दोनों ने कड़ी आलोचना की। हालांकि, सलमान पर उंगलियां कम उठीं, जबकि रेमो को ज्‍यादा कसूरवार बताया गया था। फिल्‍म के ऊबाऊ होने के इल्‍जाम भी रेमो पर ही लगे थे।

Wednesday, September 26, 2018

सोपोर में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने दो आतंकी ढेर किए

रीनगर. जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, इलाके में और भी आतंकी छिपे होने की आशंका है। सरक्षाबल सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। 

पुलवामा-शोपियां में तलाशी अभियान तेज

  1. पुलिस ने बताया, सुरक्षाबलों को तुज्जर इलाके के नौपोरा गांव में कुछ आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इसी दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।
  2. सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मारे गए। वहीं, प्रशासन ने मुठभेड़ के चलते इलाके के सारे स्कूल बंद कर दिए हैं। इंटरनेट पर भी रोक लगा दी गई है।
  3. दक्षिण कश्मीर में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से सुरक्षाबल पुलवामा और शोपियां में तलाशी अभियान चला रहे हैं। खुफिया विभाग ने इलाके में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी दी थी।
  4. हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने शुक्रवार को शोपियां से पुलिस के तीन जवानों को अगवा कर लिया था। बाद में उनके शव गोलियों से छलनी मिले।
    नेशनल डेस्क/अमेठी: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल सौदे को लेकर मोदी सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं। इस बीच उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो कि अमेठी दौरे के दौरान का है, इस वीडियो में राहुल गांधी कह रहे हैं- 'अभी तो शुरुआत हुई है। अभी देखना, मजा आएगा। आने वाले 2-3 महीने में मजा दिखाएंगे हम आपको।' इससे पहले अगस्त में राहुल ने कहा था कि राफेल में वैश्विक भ्रष्टाचार है। आने वाले कुछ हफ्तों में राफेल से बड़े बम गिरने वाले हैं।
    राहुल ने कहा- मोदी चौकीदार नहीं, चोर हैं
    राहुल ने कहा कि एक-एक कर हम दिखा देंगे कि नरेंद्र मोदी
    नेशनल डेस्क, चेन्नई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2019 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। यह नामांकन भाजपा तमिलनाडु की अध्यक्ष डॉ. तमिलसाई सौंदराजन ने कराया। इसके लिए उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर योजना ‘आयुष्मान भारत’ का हवाला दिया है।
    बीजेपी अध्यक्ष के पति ने भी नामांकन किया : तमिलसाई के पति डॉ. पी. सौंदराजन ने भी प्रधानमंत्री को इस सम्मान के लिए नामांकित किया है। डॉ. पी. सौंदराजन नेफ्रोलॉजी के वरिष्ठ परामर्शदाता और राज्य के प्राइवेट विश्वविद्यालय के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष हैं।
    - सौंदराजन ने कहा कि पीएम मोदी दूरदर्शी हैं, जिन्होंने करोड़ों लोगों की सहूलियत के लिए यह योजना लागू की है। पार्टी अध्यक्ष ने बताया कि देश में गरीबी को देखते हुए यह हेल्थकेयर योजना काफी सराहनीय है।
    तमिलसाई ने देश-विदेश के सभी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और आम नागरिकों से नोबेल शांति पुरस्कार 2019 के लिए पीएम मोदी के नामांकन में उनका साथ देने की अपील की है।
    ऐसे मिलता है नोबेल : नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 31 जनवरी 2019 है। इसकी नामांकन प्रक्रिया हर साल सितंबर में शुरू होती है। पहले चरण में जनता से नामांकन मंगाए जाते हैं। जो नाम मिलते हैं उन पर एक्सपर्ट्स विचार करते हैं।
    - नामांकित लोगों की खासियतों, उनकी खोज पर चर्चा होती है। नामित व्यक्ति के बारे में संबंधित देश की सरकार, पूर्व नोबेल विजेताओं, प्रोफेसरों से राय मांगी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया करीब एक साल तक चलती है।
    किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत नोबेल पुरस्कार के लिए उसका नाम नामित करने का नियम नहीं है, किन्तु यदि नामांकन के उपरांत व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसे पुरस्कार प्रदान किया जा सकता है। अब तक दो बार ऐसा हो चुका है।
    - यदि किसी श्रेणी में दो विजेताओं को संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया जा रहा है, तो पुरस्कार राशि को बराबर भाग में बांटा जा सकता है। यदि तीन विजेता हैं तो प्रथम विजेता को आधी और शेष राशि को अन्य दो विजेताओं में बराबर बांटा जा सकता है।
    चौकीदार नहीं हैं, चोर हैं। मोदी सरकार ने हर जगह बेईमानी की है। मोदी के राफेल, ललित मोदी, विजय माल्या, नोटबंदी, गब्बर सिंह टैक्स जैसे सभी कामों में चोरी हुई है।
    राहुल ने कहा था- मोदी चोरों के सरगना
    कांग्रेस अध्यक्ष ने सोमवार को ट्विटर पर एक वीडियो को शेयर करत मोदी को चोरों का सरगना (इंडियाज कमांडर इन थीफ) बताया था। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरोपों पर कहा कि कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार को बदनाम करने का अभियान चला रही है।
    ओलांद के बयान पर बढ़ा था विवाद
    ओलांद ने कहा था कि रिलायंस को राफेल के स्थानीय भागीदार के रूप में चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। हालांकि, 24 घंटे बाद ही उन्होंने कहा- रिलायंस को चुने जाने के बारे में दैसो ही कुछ बता सकती है।

Monday, September 10, 2018

मोदी के पक्ष में कैसे जुटा मीडिया?

जैसा अभूतपूर्व वह छविहनन अभियान था उतना ही वह जनसमर्थन रहा है जिसने मोदी को एक आंधी बना कर प्रधानमंत्री बना दिया. इसलिए यह कहना कि मोदी को मीडिया ने बनाया है मज़ाक है.
मीडिया के बड़े हिस्सों का मोदी के पक्ष में जुटना तब हुआ जब प्रचार अभियान के दौरान उनको मिल रहे ऐतिहासिक समर्थन और स्वीकार्यता की अप्रत्याशित लहर का एहसास होना शुरू हुआ.
वह लहर मोदी और शाह की रणनीति, चुनावी तैयारी, विराट संसाधनों और टेक्नोलॉजी के कभी न देखे गए इस्तेमाल और सबसे ज़्यादा मोदी की अपनी ऊर्जावान, मौलिक वक्तृता और नए सपने दिखाने की कला से पैदा हुई थी. मीडिया इस गाड़ी में बाद में सवार हुआ.
शिव कहते हैं, दो दशक पहले मोदी पूरी तरह एक अफ़वाह थे. यह अद्भुत स्थापना है. सच यह है कि दो दशक पहले वह भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता थे जो बाद में महासचिव बने.
उनका गुजरात जाना, मुख्यमंत्री बनना किसी सोची समझी योजना के तहत नहीं भाजपा और गुजरात के भीतर उस समय की परिस्थितियों ने अचानक संभव कर दिया. वह अफ़वाह नहीं कभी-कबार मीडिया में आने वाले एक पार्टी नेता थे, बस.
मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद गोधरा और गुजरात दंगों में मोदी की छवि मीडिया ने एक आइकन या आदर्श नहीं इसके बिलकुल उलट एक भयानक खलनायक की बनाई थी.
इस अभूतपूर्व रूप से नकारात्मक मीडिया छवि से लड़ कर, उसे हरा कर मोदी सत्ता के शिखर पर पहुंचे. मोदी मीडिया के खोजे और बनाए हुए नहीं थे तब, मीडिया के मारे हुए थे.
आज चार साल बाद स्थिति कुछ दृष्टियों से उलट गई लगती है. शिव को अभी सिर्फ़ वही दिख रही है.
जैसा ,मैं ऊपर कह चुका हूं, आज का सच सचमुच यह है कि तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया का एक प्रभावशाली हिस्सा मोदी-महिमा में शामिल है. किन्तु एक हिस्सा, पूरा नहीं. यह हिस्सा अनालोचक हो गया है. पर यह कहना कि पूरा मीडिया ऐसा हो गया है, वैचारिक अतिवादिता है और अधूरी बात है.
शिव की शिकायतें जायज़ भी हैं. नोटबंदी पर मीडिया तथ्यपरक नहीं रहा कुछ को छोड़ कर. लेकिन उस समय लगभग पूरा देश, खासतौर पर मध्यम वर्ग और खुद मोदी तथा उनकी सरकार भी नोटबंदी की अच्छाईयों के सपनों से अभिभूत थे.
वह एक अत्यंत गंभीर गलती थी, मिसकैलकुलेशन था. पर सबको यह तो दिख रहा था कि मोदी ने एक भारी राजनीतिक जोखिम उठा कर यह कदम उठाया था. वह पूरी तरह नाकाम रहा, लेकिन इसने मोदी को बड़े, क्रांतिकारी किस्म के, देशहित में कड़े और अलोकप्रिय कदम उठाने की क्षमता वाले नेता के रूप में स्थापित किया. देश नीति में मोदी पर शिव की एक टिप्पणी गौरतलब है जो चकित करती है. मोदी के शिंजो आबे, पुतिन, ट्रंप के साथ दोस्ताना तस्वीरें खिंचवाने और इनसे लोगों को मोह लेने का आरोप लगाते समय शिव कहते हैं - मीडिया इन चार देशों के नैतिक खालीपन को देखना भूल जाता है.
क्या शिव जैसे गंभीर, वरिष्ठ चिंतक यह नहीं जानते कि असली राजनय में नैतिकता हमेशा, और हर देश के लिए, एक औपचारिकता के अलावा कुछ नहीं होती. उसपर देशहित का राजनय नहीं होता न हो सकता है.
विदेश मामलों में केवल देशहित सर्वोपरि होता है और यह देशहित नैतिक नहीं आर्थिक, सैनिक या रणनीतिक होता है।
लेकिन एक बात जो अपनी मीडिया आलोचना में शिव ने नहीं कही वह मैं कहना चाहता हूं. यह दुखद है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते. चार साल में एक भी नहीं. मीडिया को दूर रखते हैं. यह गलत है.
उन्हें करनी चाहिए सभी लोकतांत्रिक प्रधानमंत्रियों, राष्ट्रपतियों की तरह. लेकिन अगर भारतीय मीडिया सचमुच उतना ही ठोस रूप से मोदी भक्त होता तो क्या मोदी उससे कतराते?

Wednesday, September 5, 2018

किसानों की कब्रगाह में बदलता पंजाब

मुख्तियार सिंह सर उठाकर पंजाब के आसमान को टकटकी बांधे देखते हैं. उनकी 75 साल पुरानी बूढ़ी आंखें यहां बरनाला ज़िले में पड़ने वाली गर्मियों की तेज़ धूप से टकराकर अचानक चुंधिया सी जाती हैं.
लेकिन वो फिर सर उठाकर आसमान को देखते हैं. इस बार आंखों में पानी लिए. तभी अचानक उनकी सांस तेज़ हो जाती है और हरी पगड़ी के नीचे जमा पसीने की बूंदे पूरे चेहरे को भिगोने लगती हैं.
वह हांफते हुए कहते हैं, "उस आख़िरी शाम जब मेरा बेटा घर आया था, तब वो भी इस आसमान को ही देख रहा था. उसकी माँ ने चाय-पानी पूछा तो बोला नहीं पीऊँगा. उसकी माँ को कुछ अजीब लगा तो उसने पैसे का पूछा. बेटे ने कहा मुझे क्या करना पैसों का?”
उस शाम मुख्तियार का बेटा गुरलाल जैसे नींद में चलते हुए घर लौटा था. फ़रवरी की ठंड में भी उसे पसीने आ रहे थे और वो बस अपना सर उठाए आसमान को देखे जा रहा था.
उसकी माँ ने पूछा, आसमान में क्या देख रहा है. जवाब में बेटे ने कहा, ‘ऊपर आसमान में पंछी गोल गोल चक्कर लगा रहे हैं. मैं ये उड़ते पंछी ही देख रहा हूँ’. बस इतना कहकर वो गश खाकर ज़मीन पर गिर पड़ा. उसके मुँह से झाग निकलने लगा.
हमने तुरंत उसे उठाकर खटिया पर लिटा दिया. तब हमें मालूम नहीं था कि वो स्प्रे (कीटनाशक) पीकर आया था. इसलिए हमने सोचा उसे कोई दौरा पड़ा है. पर इससे पहले कि हम उसे इलाज के लिए ले जा पाते, वो चला गया.
मुख्तियार बरनाला जिले के बदरा गांव में रहने वाले किसान हैं. उनके बेटे की ही तरह उनके गांव में अब तक 70 किसान बढ़ते कर्ज़ के चलते ख़ुदकुशी कर चुके हैं. बेटे की मौत के वक़्त मुख्तियार के परिवार पर भी 5 लाख रुपए का कर्ज़ था जो उन्होंने अपनी 2 बेटियों की शादी और खेती से जुड़े ख़र्चे पूरे करने के लिए लिया था.
लेनदार घर आकर पैसे मांगते और पैसे न दे पाने की वजह से गुरलाल परेशान रहते. पर घर में सबको हिम्मत बंधाने वाले इस बेटे ने किसी को अंदाज़ा नहीं होने दिया की वह अंदर ही अंदर टूट रहे थे.
मुझे देखते ही गुरलाल की बूढ़ी माँ रोने लगती हैं. बेटे से हुई आख़िरी बातचीत उनके ज़हन में अब भी ताज़ा है. पूछने पर सिर्फ़ गुरु गोविंद सिंह के छोटे साहेबजादों (गुरु गोविंद सिंह के बच्चों) के साथ लगी अपने बेटे की बचपन की तस्वीर दिखाती हैं.
उनके ख़ामोश आंसुओं की गूंज जैसे दोपहर के सन्नाटे को चीरते हुए उसी आसमान तक जाती थी, जिसको देखते हुए उनका बेटा चला गया था.
भारतीय सिनेमा में सालों से परोसी जा रही सरसों के खेतों, दूध की नदियों और नाचते गाते पंजाब के ख़ुशहाल किसानों वाली छवि के पीछे छिपी असली ज़मीनी कहानी मेरे लिए अभी शुरू ही हुई थी.
दिल्ली से शुरू हुई यात्रा जैसे ही दक्षिण पंजाब में दाख़िल होती है, आंकड़ो में खींची गई उदासीन तस्वीर आसपास ज़िंदा होने लगी. धूल की एक मोटी जर्द परत में डूबे बरनाला, संगररूर और मनसा ज़िलों के गांव किसी गहरी उदासी में डूबे थे.
साठ के दशक में हरित क्रांति के महनायकों के तौर पर उभरा पंजाब आज किसानों की क़ब्रगाह में क्यों तब्दील हो चुका है? ख़ुशहाली और समृद्धि के प्रतीक के तौर पर पहचाने जाने वाले इस राज्य में आज मौत का सन्नाटा क्यों पसरा पड़ा है? इन सब सवालों के जवाब ढूँढते हुए हम बरनाला ज़िले के भूटना गांव में रहने वाली 47 वर्षीय हरपाल कौर के घर पहुंचे.
रपाल के घर की दीवारों की तरह ही उनकी ज़िंदगी में भी कोई नहीं रंग था. बीती तीन पुश्तों में उनके घर के चार लोग आत्महत्या कर चुके हैं. इस फ़ेहरिस्त में सबसे नया नाम हरपाल के पति 50 वर्षीय भगवान सिंह का है जिन्होंने इसी जनवरी में ख़ुदकुशी कर ली. इससे पहले भगवान के पिता, उनके दादा और चाचा ने भी बढ़ते क़र्ज़ और घटती आमदनी के चलते आत्महत्या कर ली थी. साल दर साल परिवार पर बीती त्रासदियों की छाप घर के माहौल में साफ़ महसूस की जा सकती थी. स्लेटी रंग के सलवार क़मीज़ पर काले रंग का दुपट्टा ओढ़े खड़ी हरपाल के व्यक्तित्व में दुख इस तरह घुल मिल गया था जैसे उनके शरीर का कोई हिस्सा हो. देर तक ख़ामोश रहने के बाद हरपाल ने बातचीत शुरू की. हमारे पास एक एकड़ से भी कम ज़मीन है. इस ज़मीन पर सिर्फ़ जानवरों के लिए चारा उग पाता है. खेती के लिए हमें ज़मीन किराए पर लेनी पड़ती है. पिछले साल भी हमने 15 एकड़ ज़मीन ठेके पर लेकर खेती की थी. सारी फ़सल तैयार खड़ी थी कि साल के आख़िर में ओले पड़ गए. हमारी खड़ी फ़सल बर्बाद हो गयी.
मेरे पति को वैसे भी ब्लड प्रेशर था. वो फ़सल ख़राब होने की टेंशन ले गए. परेशान रहने लगे. अक्सर रोते रहते और मुझसे कहते कि अब वो अकेले हो गए हैं. पहले से ही हमारे सर पर 8 लाख का क़र्ज़ था, उसपर भी फ़सल ख़राब हो गई तो हालात क़ाबू के बाहर हो गए”.
हरपाल बताती हैं कि उनके और उनके पति के लिए इस मुश्किल जीवन की पृष्ठभूमि उनकी शादी से पहले ही तैयार हो चुकी थी. उनके शादीशुदा जीवन की सबसे पुरानी यादें भी क़र्ज़ से आज़ाद नहीं हैं. वह जोड़ती हैं, “मेरे पति ने सारी ज़िंदगी जी तोड़ मेहनत की. ख़ुद फ़सल की रोपाई करते, फिर सिंचाई और देखभाल भी. दिसंबर की ठंड में भी जानवरों की रखवाली के लिए उन्हें खेतों पर जाना पड़ता था. पर हमारी क़िस्मत जैसे पहले ही तय हो चुकी थी.”
हरपाल का परिवार क़र्ज़ के एक ऐसे दुश्चक्र में फँस गया था जो पीढ़ी दर पीढ़ी घर के सदस्यों को निगलता जा रहा था.
“पहले दादा ने ख़ुदकुशी की फिर उनका क़र्ज़ न उतार पाने की वजह से मेरे ससुर ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने भैसों के गले में बांधी जाने वाली रस्सी से ख़ुद को फाँसी लगाई थी. इसी तरह बढ़ते क़र्ज़ के चलते मेरे ससुर के भाई ने भी स्प्रे पीकर ख़ुदकुशी कर ली. अब इन सबके जाने के बाद घर में जो लड़कियाँ बचीं थीं, उनकी शादी की ज़िम्मेदारी मेरे पति पर ही आ गई.
उन्होंने चाचा की बेटियों और अपनी बहनों तक सबकी शादियाँ करवाईं, लेकिन जब अपने बच्चों की बारी आई तो उनके पास कुछ नहीं बचा था. वो रोते और मुझसे कहते थे कि सब उनके सर कर्ज़ा डाल कर उन्हें अकेला छोड़ कर चले गए.”
घर में हुई तीन आत्महत्याओं के बाद हरपाल को शक तो था कि उनके पति ऐसा कुछ कर सकते हैं. इसलिए वो पति को अकेला नहीं छोड़ती थीं.
लेकिन 15 जनवरी 2018 की रात भगवान सिंह रोज़ की तरह जानवरों से खेत की रखवाली करने के लिए घर से निकले. पत्नी ने उन्हें रात का खाना साथ में बाँध कर दे दिया था. पर सबके सो जाने के बाद बीच रात भगवान वापस घर लौटे. घर के एक कमरे में उनकी पत्नी और बच्चे सो रहे थे. ठीक उसके बाज़ू वाले कमरे में उन्होंने ख़ुद को फाँसी लगा ली. अगले दिन सारी दुनिया के लिए सुबह हुई पर हरपाल के जीवन में ये रात इतनी जल्दी ख़त्म होने वाली नहीं थी.